धरती के स्वर्ग पर करोड़ों का दवा खरीद घोटाला

श्रीनगर: राजनीति और आतंकवाद को लेकर केंद्र में रहने वाला जम्मू-कश्मीर इस बार दवा खरीद में करोड़ों के घोटाले को लेकर चर्चा में है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपए के घोटाले का खुलासा होने से घाटी में हलचल मच गई है।

वित्तमंत्री डॉ. अहमद द्राबू द्वारा विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में सामने आया कि राज्य के मरीजों को 50.95 लाख दवाइयां घटिया स्तर की दे दी गई। विभाग ने 89.08 करोड़ के उपकरण और दवाइयां एक्सपायर्ड रेट कांट्रेक्ट्स, स्वास्थ्य संस्थान से बाहर अथवा स्थानीय बाजार से खरीदे गए हैं। इनमें 44.28 करोड़ रुपए की दवाइयां और 34.80 करोड़ रुपए के उपकरण शामिल हैं। इसी प्रकार 1.17 करोड़ रुपए के चिकित्सा उपकरण फर्जी सप्लाई ऑर्डर के आधार पर खरीद लिए, जबकि अस्पतालों को मिलने के बावजूद 1.21 करोड़ रुपए के चिकित्सा उपकरण ढांचागत सुविधाओं एवं प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में स्थापिश्रीनगर: राजनीति और आतंकवाद को लेकर केंद्र में रहने वाला जम्मू-कश्मीर इस बार दवा खरीद में करोड़ों के घोटाले को लेकर चर्चा में है। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपए के घोटाले का खुलासा होने से घाटी में हलचल मच गई है।

वित्तमंत्री डॉ. अहमद द्राबू द्वारा विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में सामने आया कि राज्य के मरीजों को 50.95 लाख दवाइयां घटिया स्तर की दे दी गई। विभाग ने 89.08 करोड़ के उपकरण और दवाइयां एक्सपायर्ड रेट कांट्रेक्ट्स, स्वास्थ्य संस्थान से बाहर अथवा स्थानीय बाजार से खरीदे गए हैं। इनमें 44.28 करोड़ रुपए की दवाइयां और 34.80 करोड़ रुपए के उपकरण शामिल हैं। इसी प्रकार 1.17 करोड़ रुपए के चिकित्सा उपकरण फर्जी सप्लाई ऑर्डर के आधार पर खरीद लिए, जबकि अस्पतालों को मिलने के बावजूद 1.21 करोड़ रुपए के चिकित्सा उपकरण ढांचागत सुविधाओं एवं प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में स्थापित ही नहीं हो पाए। कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा एक ही दवाइयां अलग-अलग रेट पर खरीदी गई। खरीद प्रक्रिया में बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है।

नियमों के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों को कोई दवाई अथवा डिस्पोजेबल का प्रयोग करने से पहले इसे ड्रग कंट्रोलर या किसी मान्यताप्राप्त लैबोरेट्री को सैंपल भेजना होता है, ताकि इन सैंपलों की टैस्टिंग के बाद सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित दवाई अथवा डिस्पोजल उच्च गुणवत्ता का है, लेकिन कैग की जांच के दौरान पाया गया कि राज्य के अनेक स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसी टेस्टिंग नहीं करवाई गई थी। स्टेट ड्रग एंड फूड कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन, श्रीनगर के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2010 से 2015 तक विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से केवल 1733 सैंपल लिए गए, जिनमें से 43 निम्न गुणवत्ता के पाए गए। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में 50.95 लाख गोलियां, कैप्सूल व इंजेक्शन भी गुणवत्ताविहीन मिले ।त ही नहीं हो पाए। कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा एक ही दवाइयां अलग-अलग रेट पर खरीदी गई। खरीद प्रक्रिया में बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है।
नियमों के अनुसार स्वास्थ्य संस्थानों को कोई दवाई अथवा डिस्पोजेबल का प्रयोग करने से पहले इसे ड्रग कंट्रोलर या किसी मान्यताप्राप्त लैबोरेट्री को सैंपल भेजना होता है, ताकि इन सैंपलों की टैस्टिंग के बाद सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित दवाई अथवा डिस्पोजल उच्च गुणवत्ता का है, लेकिन कैग की जांच के दौरान पाया गया कि राज्य के अनेक स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसी टेस्टिंग नहीं करवाई गई थी। स्टेट ड्रग एंड फूड कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन, श्रीनगर के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2010 से 2015 तक विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से केवल 1733 सैंपल लिए गए, जिनमें से 43 निम्न गुणवत्ता के पाए गए। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में 50.95 लाख गोलियां, कैप्सूल व इंजेक्शन भी गुणवत्ताविहीन मिले ।

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