सस्ती दवा के लिए देने पड़ सकते हैं ज्यादा दाम!

नई दिल्ली। अगर आप मेडिकल स्टोर से सस्ती दवा लेना चाहते हैं तो आपको अलर्ट रहना होगा, वरना आपको सस्ती दवा के ज्यादा दाम देने पड़ सकते हैं। दरअसल, अब जल्द ही केमिस्ट की दुकानों पर संचालकों को जेनरिक दवाओं का अलग कार्नर बनाना पड़ेगा और उस पर ‘जेनरिक मेडिसिन’ शब्द लिखना होगा।  इसका डिस्पले भी इस तरह से होगा कि लोग आसानी से देख सकें। केंद्र सरकार की ओर से इस व्यवस्था पर काम किया जा रहा है और जल्द ही ये गाइडलाइंस एक नियम के रूप में सभी राज्य सरकारों को भेज दी जाएगी। इस नियम का मकसद मरीजों को सस्ती जेनरिक दवाएं आसानी से उपलब्ध करवाना है।
गौरतलब है कि बहुत सी कंपनियां जेनरिक दवाएं बनाती हैं, लेकिन ये दवाएं आसानी से केमिस्ट दुकानों पर नहीं मिलती। संचालक भी मार्जिन के चक्कर में जेनरिक दवाएं बेचने में कोई खास रुचि नहीं दिखाते। दूसरी ओर, लोगों को भी मालूम नहीं होता कि उन्हें मिलने वाली दवाएं जेनरिक हैं या नहीं।  लिहाजा अधिकतर लोग सस्ती जेनरिक दवाएं होते हुए भी महंगी दवाओं से इलाज करवाने को मजबूर हैं। ड्रग कंट्रोलर जनरल (इंडिया) डॉ. एस. ईश्वरा रेड्डी ने बताया कि बीते दिनों आयोजित ड्रग टेस्टिंग एडवाइजरी बोर्ड की बैठक में ये निर्णय लिया गया है कि हर दवाखाने (फार्मेसी शॉप) में जेनरिक दवाओं का अलग रैक व शेल्फ बनानी होगी, ताकि जेनरिक दवाओं की विजिबिलिटी आसान हो और मरीज व तीमारदार जान सकें कि उन्हें जेनरिक दवाएं ही दी जा रही हैं। इसके लिए ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स, 1945 के नियम 65 में संशोधन के लिए प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया गया है।
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