दवा विक्रेताओं के सामने कई परेशानियां

लुधियाना। पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन की राज्य स्तरीय बैठक लुधियाना में संपन्न हुई। इसमें सभी 22 जिलों के अध्यक्ष, महासचिव तथा उनके कुछेक पदाधिकारी ही बैठक में मौजूद थे। बैठक में राज्य केमिस्ट एसोसिएशन का माहौल खराब करने वाले मोहाली, पटियाला तथा जालंधर के तीन व्यक्तियों पर चर्चा हुई। यह तीनों सदस्य संगठन विरोधी कार्य करने में संलिप्त दिखे, जिसका प्रदेशभर से आए हुए जिलाध्यक्षों, महासचिवों ने पदाधिकारियों के सामने खुलासा भी किया।  सभी ने एकमत होकर इस निर्णय का स्वागत किया कि संबंधित तीनों व्यक्तियों का बहिष्कार किया जाए। बैठक में पटियाला के वरिष्ठ पदाधिकारी राजी के स्वर्गवास के चलते दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी गई। इस मौके पर राज्य महासचिव सुरेंद्र दुग्गल ने वर्ष 2017-18 का लेखा- जोखा वित्त सचिव वीरेंद्र मित्तल की उपस्थिति में सार्वजनिक किया। दुग्गल ने बताया कि राज्य संगठन को रजिस्टर्ड करवा लिया गया है।
पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन (पीसीए) का अपना जीएसटी नंबर भी ले लिया है, जिसके हर माह व तिमाही पर रिटर्न सरकार को भेजी जाती है। दुग्गल ने कहा कि राज्य संगठन का कार्यकाल 30 जून 2018 को समाप्त हो रहा है। राष्ट्रीय कार्यालय के निर्देशों के चलते शीघ्र राज्य संगठन का चुनाव करवाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों के विपरित पंजाब में राज्य संगठन का चुनाव मात्र जिलों के जिला महासचिव व अध्यक्ष द्वारा ही मतदान का प्रयोग कर किया जाता है। राष्ट्रीय कार्यालय ने बदलाव कर मताधिकार जिलों के डेलीगेट्स द्वारा करवाने की रूपरेखा बना कर दी थी, जिस पर लुधियाना बैठक में सार्वजनिक सहमति नहीं बन पाई।
दुग्गल ने थोक दवा विक्रेताओं के व्यापार में आ रही समस्याओं के बारे में बताया कि कुछ कंपनियों का आपस में विलय तो हो रहा है परंतु दवा विक्रेताओं को विलय पश्चात दवाओं की आपूर्ति में बहुत कठिनाइयां आ रही हैं। इसके बारे राष्ट्रीय कार्यालय को सूचित कर दिया है। एक्सपायरी ब्रेकिंग के मुद्दे पर बताया कि राज्य संगठन ने राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को बताया कि इस सामान की वापसी पर कड़े नियमों का पालन ना करवाया जाए ।
सभी ने प्रदेश अध्यक्ष सुरजीत मेहता के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
बैठक में पंजाब सरकार द्वारा फार्मेसी कौंसिल के नामित सदस्य कुलदीप नंदा को सम्मानित भी किया गया। सदस्यों की मांग थी कि अवैध रूप से बिना पढ़े डिप्लोमा इन फार्मेसी का प्रमाण पत्र लेकर कार्य कर रहे लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई कर उनके प्रमाण पत्र रद्द किए जाएं तथा 4 वर्षों से डिप्लोमा इन फार्मेसी के प्रमाण पत्र जारी हो पाने के कारण राज्यभर में फार्मासिस्टों का टोटा बना हुआ है, इस समस्या का समाधान समय रहते निकालें। नंदा ने भरोसा दिलाया कि वह शीघ्र लंबित फाइलों पर कार्य कर फार्मासिस्टों की समस्या का समाधान करवाने का भरसक प्रयास करेंगे।
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