पत्नी ने दी पेनकिलर तो पति को हो गई 24 साल की जेल !

नई दिल्ली: भारत से पत्नी द्वारा यूएई में रहने वाले बीमार पति के लिए दवा भेजना मुसीबत का कारण बन गया। भेजी गई दर्द निवारक गोली खाकर राहत मिलना तो दूर, उलटा पति को 24 साल जेल की सजा हो गई। जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मी मोताम के पति संयुक्तअरब अमीरात में नौकरी करने गए थे। कुछ समय पहले पति की तबीयत खराब हो गई। पत्नी से फोन पर बातचीत में पति ने बीमारी से परेशानी की बात बताई। इस पर लक्ष्मी ने पति के लिए पेनकिलर (दर्दनिवारक) ट्रैमाडॉल की 20 टैबलेट्स भेजी। चूंकि संयुक्त अरब अमीरात में 400 से ज्यादा दवाओं पर प्रतिबंध है और ट्रैमाडॉल भी इन्हीं में से एक है, इस कारण यूएई सरकार ने इस जुर्म मानते हुए रोगी पति को 24 साल कारावास की सजा सुना दी। दवाओं पर प्रतिबंध 2010 से है।

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में लक्ष्मी ने कहा कि उसके पति कुली का काम करते थे और अकसर दवाएं भेजने को कहते थे। यह तीसरा मौका था जब उसने दवाएं भेजी। 2016 में भेजी गई दवा के चलते लक्ष्मी के पति को यूएई में 24 साल की जेल हुई है। लक्ष्मी को उस वक्त पता चला जब काफी दिन बाद भी घर न तो पैसे पहुंचे और न ही फोन आया।
यूएई में भारतीय तनावग्रस्त

जानकारी के मुताबिक, खाड़ी देशों में काम कर रहे भारत के कामगार तनावग्रस्त जीवन जी रहे हैं। चिलचिलाती गर्मी में कई घंटे काम करने के बाद वे पेनकिलर का सहारा लेते हैं। कई कामगारों को लगता है कि छुट्टी करने से पैसा कटेगा इसीलिए दर्दनिवारक दवा के सहारे वे काम पर लगे रहते हैं। कबूतरबाज और बिचौलियों के संपर्क में आने से कई लोग खाड़ी देशों तक पहुंच तो जाते हैं लेकिन उन्हें वहां के कायदे कानून की ज्यादा जानकारी नहीं होती। खाड़ी के देशों में कई दवाएं प्रतिबंधित हैं। दवाओं के गैरकानूनी कारोबार के चलते यूएई में अब सख्त तलाशी अभियान चल रहा है।

दुबई में ऐसे मजदूरों की मदद करने वाली वकील अनुराधा के मुताबिक, ऐसे लोगों में ज्यादातर गरीब और अशिक्षित होते हैं। वे बड़े सपने लेकर यूएई आते हैं। दवाओं की वजह से मुझसे मदद मांगने वाले भारतीयों में से ज्यादातर के पास ट्रैमाडॉल थी। अनुराधा अब तक ऐसे छह भारतीयों का केस लड़ चुकी हैं। अनुराधा भारत सरकार के रुख से निराश हैं। उनका कहना है कि भारत सरकार इस समस्या के लिए कुछ नहीं कर रहा। भारत के माइग्रेट प्रोटेक्शन अफसर या इमीग्रेशन अधिकारी कामगारों को इस दवा को ले जाने से जुड़ी चेतावनी नहीं देते हैं। उधर, भारतीय विदेश मंत्रालय यूएई से इस मुद्दे पर बराबर संपर्क की बात कह रहा है।

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