दवा उद्योग में रौनक भरी होगी अगली तिमाही

अहमदाबाद: जीएसटी के चलते जुलाई महीने के दौरान बिक्री में 2.4 फीसदी की गिरावट (कीमत के लिहाज से) से भारतीय दवा बाजार की बिगड़ी चाल धीरे-धीरे सुधर रही है। मार्केट रिसर्च फर्म के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले माह अगस्त में भारतीय दवा बाजार में साल दर साल के हिसाब से 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

एआईओसीडी फार्मासॉफ्टेक एडब्ल्यूएसीएस (एएफए) के आंकड़ों पर गौर करें तो त्वचा रोग के इलाज में काम आने वाली दवा के क्षेत्र में बिक्री 12.7 फीसदी की बढ़त देखी गई। गैस्ट्रो-इंटेस्टाइन क्षेत्र में 2.4 फीसदी और विटामिन में 1.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसी तरह मधुमेह रोधी क्षेत्र में 10.6 फीसदी इजाफा हुआ तो कुछ अन्य क्षेत्रों में दो अंकों का सुधार देखा गया। हालांकि जीएसटी के पहले महीने यानी जुलाई के मुकाबले बेशक यह बढ़त धीमी रही, फिर भी दवा उद्योग पटरी पर लौट रहा है। हृदय रोग की दवा काक्षेत्र महीने के दौरान 8.1 फीसदी और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की दवा का क्षेत्र 5.6 फीसदी बढ़ा। आंकड़े बताते हैं कि 10 बड़ी कंपनियों में जायडस कैडिला फार्मास्युटिकल में सबसे ज्यादा 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई जबकि मेनकाइंड फार्मा में 11 फीसदी और ल्यूपिन में 8.9 फीसदी इजाफा हुआ।

एएफए निदेशक अमीष मासुरेकर की मानें तो जुलाई में बिक्री की गिरावट मुख्य रूप से जीएसटी के क्रियान्वयन से ठीक पहले हुई थी लेकिन बाद में इसका असर जाता रहा। अगस्त 2016 में उच्च बढ़त दर्ज की गई। साल दर साल के हिसाब से यह 17 फीसदी रही। कुलमिलाकर अगस्त 2017 में 2.4 फीसदी की सुस्त रफ्तार बेशक दर्ज हुई मगर आगामी तिमाहियों में भारतीय दवा बाजार के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं है।

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