बैन दवा को बाजार से न हटाया तो किसी भी समय होगी कार्रवाई

अम्बाला। केंद्रीय सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर 328 फिक्स्ड डोज कांबिनेशन को तुरंत प्रभाव से बैन कर दिया था, जिसके सार्वजनिक होते ही देशभर में दवा व्यवसायियों में हडक़ंप की स्थिति सामने आई। दवा विक्रेता तथा दवा निर्माता इस जुगत में लग गए कि एकाएक निर्माण स्थल, राज्य वितरक स्टॉकिस्ट तथा रिटेलर्स के पास मौजूद स्टॉक को कैसे समाप्त किया जाए। ऐसे में कुछ औषधि निर्माताओं ने इस गजट नोटिफिकेशन के विरुद्ध दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की कि उन्हें फैक्ट्री, गोदाम तथा अन्य स्थानों से दवाओं को समाप्त करने के लिए समय दिया जाए। हाई कोर्ट दिल्ली ने शरण में आए करीब 10 दवा निर्माताओं को कुछ राहत देते हुए कहा कि बैन दवाओं का निर्माण तो नहीं कर सकते परंतु 9 अक्टूबर तक मौजूद स्टॉक को अवश्य बेच सकते हैं।
ऐसे में बाजार में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया कि सभी दवा निर्माताओं को न्यायालय से राहत मिल गई जबकि ऐसा नहीं हुआ था। इस सारे मामले में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के कार्यालय ने राज्यों के औषधि नियंत्रक के माध्यम से यह सूचना एकत्रित करनी शुरू कर दी कि किस-किस दवा निर्माता ने गजट नोटिफिकेशन के बावजूद अपनी मनमानियां जारी रखी। राहत मात्र उन दवा निर्माताओं को मिली जो न्यायालय की शरण में गए। शेष की सूची पर शीघ्र ही ड्रग्स कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया राज्यों के औषधि नियंत्रकों के माध्यम से दवा बाजार में एकाएक औचक निरीक्षण की झड़ी लगा दवा व्यापार में गलत काम करने वालों पर शिकंजा कसने की नीति को अंतिम रूप दे रहा है। कार्रवाई किसी भी दिन और किसी भी समय अमल में लाई जाएगी। इससे दवा व्यापारियों की मुश्किलें एकाएक बढ़ सकती हैं।
वहीं, औषधि प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यदि दवा विक्रेता अपने व्यापारिक स्थल से बैन दवाओं को हटाने की प्रक्रिया अपनाते हुए पाए जाते हैं तो उन पर कुछ नरमी बरती जा सकती है अन्यथा न्यायालय के आदेशों व गजट नोटिफिकेशन की अवमानना का दंड दवा विक्रेता से दवा निर्माता तक को कड़ाई से भुगतना ही होगा। इसी 9 अक्टूबर को कोर्ट ने एक नामी कंपनी के कुछ समय की मांग पर गौर करते हुए 22 तथा 31 अक्टूबर का समय प्रदान किया है। इसके बाद कोई भी ढिलाई नहीं बरती जाएगी। इस सुगबुगाहट से बाजार में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है। यदि न्यायालय कोई कठिन निर्णय सार्वजनिक करता है तो संपूर्ण देश में दवाओं का एकाएक टोटा होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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