तीन सौ करोड़ के दवा घोटाले में खुलासा, कैग को नहीं सौंपी जांच

अम्बाला। सांसद दुष्यंत चौटाला के 300 करोड़ रुपए के दवा घोटाला मामले में नया मोड़ आ गया है। इस घोटाले के खुलासे के बाद राज्य सरकार ने कार्यप्रणाली में पारदर्शिता दर्शाते हुए कैग जांच की बात कही थी। इस पर कुछ जागरूक समाजसेवियों ने सरकार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता जानने के मन से आरटीआई दाखिल की। इससे सरकार स्वयं कटघरे में खड़ी पाई गई। आरटीआई एक्टिविस्ट को सरकार ने सूचित किया कि हरियाणा में कैग जांच आयोग को इसका जिम्मा नहीं दिया गया था।
सरकार ने अपने सूचना तंत्र के माध्यम से सार्वजनिक किया था कि कैग इस बारे जांच-पड़ताल कर रही है। आरटीआई के माध्यम से मिली सूचना के आधार पर यह साबित हो गया है कि सरकार की करनी और कथनी दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। आरटीआई के एक अन्य जवाब में हरियाणा सरकार ने बताया कि लोकसभा में उठे सवालों पर हरियाणा सरकार विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है जिसका खुलासा शीघ्र सार्वजनिक किया जाएगा। सवाल उठता है कि सरकार इस दवा घोटाले को पारदर्शी जांच के माध्यम से रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही। क्या सरकार इस खुलासे को घोटाला नहीं मान रही जबकि कुछ सूचना तंत्र के साथियों ने मामला सार्वजनिक किया कि जिस कंपनी, व्यापारिक प्रतिष्ठान के बिल विभागों को दिए गए, वहां खाली प्लॉट मौके पर हैं या एक नंबर के 2 ऐड्रेस अस्तित्व में हैं। ऐसे में इन दस्तावेजों से सरकार की छवि धूमिल होना लाजिमी है ।
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