भारत क्यों नहीं बचा पा रहा अपने नवजात बच्चे

By: बलदेव मल्होत्रा
May 19 2017

नई दिल्ली: स्वास्थ्य सुविधाओं के लाख दावे करने वाला भारत हेल्थ केयर में अपने छोटे अपने पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, श्रीलंका और बांग्लादेश से भी पीछे खड़ा है। द लॉन्सेट में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज द्वारा किए गए शोध में यह खुलासा हुआ है। शोध में 195 देश शामिल किए गए। सभी देशों की 1990-2015 के बीच रही हेल्थ केयर की जानकारी दी गई है। शोध में 32 ऐसी बीमारी सामने आई हैं जिनका परिणाम प्रभावी स्वास्थ्य देखभाल में घातक नहीं होना चाहिए। यह सच भी सामने आया कि लगातार बढ़ रही आर्थिक ग्रोथ के बावजूद भारत का हेल्थ केयर विभाग उद्देश्यों को पूरा करने में विफल रहा है। हालांकि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मुकाबले भारत ने सुधार में अव्वलता हासिल की है।
           भारत में सबसे ज्यादा नवजात शिशुओं की मृत्यु होती है और भारत का इसमें सुधार लाने में बेहद खराब प्रदर्शन रहा है। शोध के मुताबिक, हेल्थ केयर के मामले में भारत की पिछले 25 सालों में 14.1 की वृद्धि हुई है जो संख्याओं के हिसाब से भारत अपने पड़ोसी राज्यों से बहुत पीछे हैं। भारत की 1990 में संख्या 30.7 थी और 2015 में यह संख्या 44.8 रही है। वहीं, भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो बांग्लादेश की 51.7, श्रीलंका की 72.8, भूटान की 52.7 और नेपाल की 50.8 संख्या रही है।  एशियाई देशों में श्रीलंका शीर्ष स्थान पर रहा। श्रीलंका का हेल्थ केयर विभाग अपने मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर बहुत गंभीर है। हार्ट डिजिज के मामले में भारत को 25वां स्थान मिला जबकि ट्यूबरक्लॉसिस में 26, किडनी डिजीज में 20, मधुमेह में 38, अपेंडिक्स में 38 और पेप्टिक यूल्कर डिजीज में भारत 39वें नंबर पर रहा।




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हेल्थ केयर, द लॉन्सेट, ट्यूबरक्लॉसिस, किडनी डिजीज, मधुमेह, ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज