भारत मेंं इलाज के लिए बनेगी नई गाइडलाइंस

By: बलदेव मल्होत्रा
May 15 2017

पेट का कैंसर : अब पहली स्टेज पर ही निकालेंगे स्टोन
चंडीगढ़ :
पीजीआई में आने वाले पेट कैंसर (गॉल ब्लैडर)के मरीजों का इलाज नई तकनीक  से होगा। मरीजों में पत्थरी को अब पहली स्टेज पर ही निकाल दिया जाएगा ताकि इस जानलेवा बीमारी का जड़ से खात्मा किया जा सके। इसके बाकायदा नई गाइलाइंस तैयार की जाएगी।
        इंडियन एसोसिएशन ऑफ सर्जिकल ओंकोलॉजी की ओर से पीजीआई में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई। नई गाइडलाइंस तैयार करने के लिए पीजीआई के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के एचओडी प्रो. जीआर वर्मा, एसजीपीजीआई लखनऊ के गैस्ट्रो ओंकोलॉजिस्ट प्रो. राजन सक्सेना, दिल्ली के जीबी पंत हॉस्पिटल से प्रो.अनिल अग्रवाल और टाटा मैमोरियल हॉस्पिटल मुंबई से डॉ. शैलेश श्रीखंडे की एक टास्क फोर्स गठित की गई है। प्रो. जीआर वर्मा ने बताया कि अब तक गॉल ब्लैडर कैंसर के मरीजों का इलाज अमेरिका की नेशनल कैंसर कंट्रोल नेटवर्क द्वारा गठित गाइडलाइंस के आधार पर होता था परंतु अब पीजीआई में गैस्ट्रो ओंकोलॉजी सर्जन्स ने कैंसर खात्मे के लिए गॉल ब्लेडर की पत्थरी को उस वक्त निकालने का फैसला किया है जब शुरुआत में पत्थरी बनना शुरू होती है। पहले इसे तब निकाला जाता था, जब पत्थरी से पेशेंट को दर्द होता था।
      प्रो. वर्मा ने कहा कि टास्क फोर्स में रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट को भी शामिल किया जाएगा ताकि गॉल ब्लेडर कैंसर का सटीक इलाज हो सके। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी के दौरान यही तय किया गया है कि अब भारतीयों के पेट के कैंसर का इलाज अमेरिकन गाइडलाइंस पर नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि पश्चिम लोगों में पाए जाने वाले कैंसर सैल्स और भारतीयों के कैंसर सैल्स की नेचर और बिहेवियर अलग-अलग है। भारतीयों के गॉल ब्लेडर कैंसर के सैल्स बहुत अग्रेसिव होते हैं जबकि पश्चिम के कैंसर पेशेंट्स में पाए जाने वाले कैंसर सैल्स शांत व्यवहार के हैं।  
       एसजीपीजीआई लखनऊ के गैस्ट्रो-ओंकोलॉजी एक्सपर्ट प्रो. राजन सक्सेना ने बताया कि पत्थरी वाले 80 प्रतिशत पेशेंट्स को गॉल ब्लेडर का कैंसर हो जाता है। जो स्टोन 10 साल तक गॉल ब्लेडर में पड़े रहते हैं, वह गाल ब्लेडर की वॉल को क्षतिग्रस्त करते हैं और उसकी वजह से गॉल ब्लेडर का कैंसर हो जाता है। यह ऐसा कैंसर है जिसकी जानकारी तब मिलती है जब वह एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है। पेशेंट्स में गाल ब्लेडर कैंसर के केसेज देखने के बाद अब भारतीय लोगों के लिए गॉल ब्लेडर स्टोन कैंसर की नई गाइडलाइंस बनाने का फैसला लिया है।




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